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Wednesday, 27 January 2021

Mere din ke khayalon ka chhoro
Unhe meri raaton ke sapno se bhi fursat nahi hai

Aur kitne din rulayegi ye kambakht yaadein
Inko mere zehen se faramosh hone ki bhi fursat nahi hai

Kya karun un tasveeron ka jo sambhal ke cloud mein rakhin hain
Ab bhi zyada dard ho to nihar leta hoon ek do

Kya unko mita dene se mit jaayenge wo saare vaaqiye
Par unhe meri zindagi se bhi jaane ki fursat nahi hai.

-Subham



ख़ता उनकी कोई भी नहीं थी, शायद हम ही गलत समझ बैठे, 
वो तरस खाकर बात करते थे, हम मोहब्बत समझ बैठे... 
- I don't know who wrote this



कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा 
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा 

वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं 
दिल-ए-बे-ख़बर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा 

मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में तेरी आस तेरे गुमान में 
सबा कह गई मेरे कान में मेरे साथ आ उसे भूल जा

-Amjad Islam Amjad

shayari

Poem

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Mere din ke khayalon ka chhoro
Unhe meri raaton ke sapno se bhi fursat nahi hai

Aur kitne din rulayegi ye kambakht yaadein
Inko mere zehen se faramosh hone ki bhi fursat nahi hai

Kya karun un tasveeron ka jo sambhal ke cloud mein rakhin hain
Ab bhi zyada dard ho to nihar leta hoon ek do

Kya unko mita dene se mit jaayenge wo saare vaaqiye
Par unhe meri zindagi se bhi jaane ki fursat nahi hai.

-Subham



ख़ता उनकी कोई भी नहीं थी, शायद हम ही गलत समझ बैठे, 
वो तरस खाकर बात करते थे, हम मोहब्बत समझ बैठे... 
- I don't know who wrote this



कहाँ आ के रुकने थे रास्ते कहाँ मोड़ था उसे भूल जा 
वो जो मिल गया उसे याद रख जो नहीं मिला उसे भूल जा 

वो तेरे नसीब की बारिशें किसी और छत पे बरस गईं 
दिल-ए-बे-ख़बर मेरी बात सुन उसे भूल जा उसे भूल जा 

मैं तो गुम था तेरे ही ध्यान में तेरी आस तेरे गुमान में 
सबा कह गई मेरे कान में मेरे साथ आ उसे भूल जा

-Amjad Islam Amjad

1/27/2021 08:42:00 am Share:

Thursday, 2 January 2020

मैं बिछड़ के तुझसे बुलंदियों पे जो पस्त हूँ,
ये उरूज है के ज़वाल है ये सवाल है।

जिस बुत पे फ़िदा हो गए, जाँ जिसपे लूटा दी,
उसने भी बिछड़ते हुए जीने की दुआ दी।

गुनहगार हैं उसके सो उसकी महफ़िल में हम,
उसके हुस्न को उसका नकाब कहते हैैं।

हम ऐसे सर-फिरे दुनिया को कब दरकार होते हैं,
अगर होते भी हैं तो बे-इंतिहा दुुष्वार होते हैं।

- Qamar Abbas




हम उसके दिल तक पहुंँचते कैसे
बदन को रस्ता समझ लिया था
मिलन जुदाई तड़प उदासी
ये खेल सारा समझ लिया था
उसे यूँ छोड़ा के उसने हमको
बहुत ज़्यादा समझ लिया था

वो तबस्सुम था जहाँ शायद वहीँ पर रह गया
मेरी आँखों का हर एक मंज़र कहीं पर रह गया
मैं तो होकर आ गया आज़ाद उसकी क़ैद से
दिल मगर इस जल्दबाज़ी में वहीँ पर रह गया
हमको अक्सर ये ख़याल आता है उसको देख कर
ये सितारा कैसे ग़लती से ज़मीं पर रह गया

एहसान ज़िन्दगी पे किये जा रहे हैं हम
मन तो नहीं है फिर भी जिए जा रहे हैं हम
पहला किसी का इश्क़ था दूजा है शायरी
दो हादसों को एक किये जा रहे हैं हम
ऐ शहर-ए-नामुराद मुबारक के अब के बार
वापस न लौटने के लिए जा रहे हैं हम

- Imtiyaz Khan




ज़िन्दगी में ग़म है
ग़म में दर्द है
दर्द में मज़ा है
और मज़े में ज़िन्दगी है

- Ghalib




उदास एक मुझ ही को तो कर नहीं जाता
वो मुझसे रूठ के अपने भी घर नहीं जाता
वो दिन गए के मोहोब्बत थी जान की बाज़ी
किसी से अब कोई बिछड़े तो मर नहीं जाता

- Waseem Barelvi




मेरी साँसों में समाया भी बहुत लगता है
और वही शख़्स पराया भी बहुत लगता है
उससे मिलने की तमन्ना भी बहुत है
लेकिन आने जाने में किराया भी बहुत लगता है

फैसला जो कुछ भी हो मंज़ूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क़ हो भरपूर होना चाहिए
अपने हाथों से बनाया है ख़ुदा ने आपको
आपको थोड़ा बहुत मग़रूर होना चाहिए

तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
फूलों की दुकानें खोलो ख़ुशबू का व्यापार करो
इश्क़ ख़ता है? तो ये ख़ता एक बार नहीं सौ बार करो

- Dr Rahat Indori
urdu

Shayari and Ghazal

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मैं बिछड़ के तुझसे बुलंदियों पे जो पस्त हूँ,
ये उरूज है के ज़वाल है ये सवाल है।

जिस बुत पे फ़िदा हो गए, जाँ जिसपे लूटा दी,
उसने भी बिछड़ते हुए जीने की दुआ दी।

गुनहगार हैं उसके सो उसकी महफ़िल में हम,
उसके हुस्न को उसका नकाब कहते हैैं।

हम ऐसे सर-फिरे दुनिया को कब दरकार होते हैं,
अगर होते भी हैं तो बे-इंतिहा दुुष्वार होते हैं।

- Qamar Abbas




हम उसके दिल तक पहुंँचते कैसे
बदन को रस्ता समझ लिया था
मिलन जुदाई तड़प उदासी
ये खेल सारा समझ लिया था
उसे यूँ छोड़ा के उसने हमको
बहुत ज़्यादा समझ लिया था

वो तबस्सुम था जहाँ शायद वहीँ पर रह गया
मेरी आँखों का हर एक मंज़र कहीं पर रह गया
मैं तो होकर आ गया आज़ाद उसकी क़ैद से
दिल मगर इस जल्दबाज़ी में वहीँ पर रह गया
हमको अक्सर ये ख़याल आता है उसको देख कर
ये सितारा कैसे ग़लती से ज़मीं पर रह गया

एहसान ज़िन्दगी पे किये जा रहे हैं हम
मन तो नहीं है फिर भी जिए जा रहे हैं हम
पहला किसी का इश्क़ था दूजा है शायरी
दो हादसों को एक किये जा रहे हैं हम
ऐ शहर-ए-नामुराद मुबारक के अब के बार
वापस न लौटने के लिए जा रहे हैं हम

- Imtiyaz Khan




ज़िन्दगी में ग़म है
ग़म में दर्द है
दर्द में मज़ा है
और मज़े में ज़िन्दगी है

- Ghalib




उदास एक मुझ ही को तो कर नहीं जाता
वो मुझसे रूठ के अपने भी घर नहीं जाता
वो दिन गए के मोहोब्बत थी जान की बाज़ी
किसी से अब कोई बिछड़े तो मर नहीं जाता

- Waseem Barelvi




मेरी साँसों में समाया भी बहुत लगता है
और वही शख़्स पराया भी बहुत लगता है
उससे मिलने की तमन्ना भी बहुत है
लेकिन आने जाने में किराया भी बहुत लगता है

फैसला जो कुछ भी हो मंज़ूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क़ हो भरपूर होना चाहिए
अपने हाथों से बनाया है ख़ुदा ने आपको
आपको थोड़ा बहुत मग़रूर होना चाहिए

तूफानों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तैर के दरिया पार करो
फूलों की दुकानें खोलो ख़ुशबू का व्यापार करो
इश्क़ ख़ता है? तो ये ख़ता एक बार नहीं सौ बार करो

- Dr Rahat Indori

1/02/2020 02:27:00 pm Share:

Sunday, 3 February 2019


Some Lines - चंद पंक्तियाँ


सावन में रुत ना बरसी, न बसंत फूल लाया
तेरे प्यार में तेरे बिन ऐसा भी साल आया
                                                         - Neelesh Misra


उलझनें क्या बताऊँ तुझे ज़िन्दगी की
तेरे ही गले लगकर तेरी ही शिकायतें करनी हैं
                                                         - Piyush Mishra


मेरा ग़म का खज़ाना है, तेरे पास मुस्कराहट
अपना जो है ले जाओ, मेरा जो है दे जाओ
                                                         - Neelesh Misra


लगता है आज ज़िन्दगी कुछ खफा है
चलिए छोड़िये कौन सी पहली दफा है
                                                         - Gulzar


टूटे हुए दिल से मुस्कुराना इश्क है
उसकी ख़ुशी के लिए उसे ही भूल जाना इश्क है
                                                         - Anonymous


बैठ तेरे सामने सोचा किये
शाम ज्यादा ख़ूबसूरत है की तू
                                                         - Neelesh Misra


दर्द हो दिल में तो दवा कीजिये 
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिये
                                                         - Mirza Ghalib


हमारे मन के कमरे में, यूँ एक मंज़र अनोखा हो 
हवा की तेज़ लहरें हों, कहीं पानी का झोंका हो 
और एक लम्हे की कश्ती पे, कुछ इस तरह तू बैठी हो
वही मेरी हकीकत हो, वही नज़रों का धोखा हो
हमारे मन के कमरे में, यूँ एक मंज़र अनोखा हो 
                                                         - Neelesh Misra


चुप रहो तो पूछता है खैर है
लो, ख़ामोशी भी शिकायत हो गयी
                                                         - Akhtar Ansari Akbarabadi


उसको मालूम कहाँ होगा, क्या खबर होगी
वो मेरे दिल के टूटने से बेखबर होगी
वक़्त बीतेगा तो ये घाव भर भी जायेंगे
पर ये थोड़ी सी तो तकलीफ़ उम्र भर होगी
                                                         - Neelesh Misra


ये कैसा नशा है
मैं किस अजब खुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुकी है
मैं इंतज़ार में हूँ
                                                         - Muneer Niyazi


अपनी यादों से कहो एक दिन की छुट्टी दे मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए
                                                         - Munawwar Rana


shayari

Some lines

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Some Lines - चंद पंक्तियाँ


सावन में रुत ना बरसी, न बसंत फूल लाया
तेरे प्यार में तेरे बिन ऐसा भी साल आया
                                                         - Neelesh Misra


उलझनें क्या बताऊँ तुझे ज़िन्दगी की
तेरे ही गले लगकर तेरी ही शिकायतें करनी हैं
                                                         - Piyush Mishra


मेरा ग़म का खज़ाना है, तेरे पास मुस्कराहट
अपना जो है ले जाओ, मेरा जो है दे जाओ
                                                         - Neelesh Misra


लगता है आज ज़िन्दगी कुछ खफा है
चलिए छोड़िये कौन सी पहली दफा है
                                                         - Gulzar


टूटे हुए दिल से मुस्कुराना इश्क है
उसकी ख़ुशी के लिए उसे ही भूल जाना इश्क है
                                                         - Anonymous


बैठ तेरे सामने सोचा किये
शाम ज्यादा ख़ूबसूरत है की तू
                                                         - Neelesh Misra


दर्द हो दिल में तो दवा कीजिये 
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिये
                                                         - Mirza Ghalib


हमारे मन के कमरे में, यूँ एक मंज़र अनोखा हो 
हवा की तेज़ लहरें हों, कहीं पानी का झोंका हो 
और एक लम्हे की कश्ती पे, कुछ इस तरह तू बैठी हो
वही मेरी हकीकत हो, वही नज़रों का धोखा हो
हमारे मन के कमरे में, यूँ एक मंज़र अनोखा हो 
                                                         - Neelesh Misra


चुप रहो तो पूछता है खैर है
लो, ख़ामोशी भी शिकायत हो गयी
                                                         - Akhtar Ansari Akbarabadi


उसको मालूम कहाँ होगा, क्या खबर होगी
वो मेरे दिल के टूटने से बेखबर होगी
वक़्त बीतेगा तो ये घाव भर भी जायेंगे
पर ये थोड़ी सी तो तकलीफ़ उम्र भर होगी
                                                         - Neelesh Misra


ये कैसा नशा है
मैं किस अजब खुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुकी है
मैं इंतज़ार में हूँ
                                                         - Muneer Niyazi


अपनी यादों से कहो एक दिन की छुट्टी दे मुझे
इश्क के हिस्से में भी इतवार होना चाहिए
                                                         - Munawwar Rana


2/03/2019 08:50:00 pm Share:
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